।। उल्लाला छंद।।
होवत बिहना रोज के,कुकरा करथे शोर जी।
बिहना उठ के देख लव, गजब सुहाथे भोर जी।।
आबे संगी मोर जी,मंदिर हावय गाँव मा।
बइठे हावय नीम के ,माता सुघ्घर छाँव मा।।
दया मया ला राखले,आही सुरता तोर जी।
अउ आबे गा गाँव मा, फेर कभू तैं मोर जी।।
गाँव गली अउ खोर मा,लइका मन के शोर जी।
सूरज लाली देख के,सुघ्घर लगथे भोर जी।।
कौंआ बइठे छानही,करत हवय गा काँव ले।
आही घर मा जी सगा, देखत हंवव गाँव ले।।
जब ले गे हे ओ शहर,आथे ओकर याद जी।
राहन दूनो साथ मा,मिलबो बड़ दिन बाद जी।।
राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद।
होवत बिहना रोज के,कुकरा करथे शोर जी।
बिहना उठ के देख लव, गजब सुहाथे भोर जी।।
आबे संगी मोर जी,मंदिर हावय गाँव मा।
बइठे हावय नीम के ,माता सुघ्घर छाँव मा।।
दया मया ला राखले,आही सुरता तोर जी।
अउ आबे गा गाँव मा, फेर कभू तैं मोर जी।।
गाँव गली अउ खोर मा,लइका मन के शोर जी।
सूरज लाली देख के,सुघ्घर लगथे भोर जी।।
कौंआ बइठे छानही,करत हवय गा काँव ले।
आही घर मा जी सगा, देखत हंवव गाँव ले।।
जब ले गे हे ओ शहर,आथे ओकर याद जी।
राहन दूनो साथ मा,मिलबो बड़ दिन बाद जी।।
राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद।