सोमवार, 9 जुलाई 2018

।। उल्लाला छंद ।।

।। उल्लाला छंद।।
होवत बिहना रोज के,कुकरा करथे शोर जी।
बिहना उठ के देख लव, गजब सुहाथे भोर जी।।

आबे संगी मोर जी,मंदिर हावय गाँव मा।
बइठे हावय नीम के ,माता सुघ्घर छाँव मा।।

दया मया ला राखले,आही सुरता तोर जी।
अउ आबे गा गाँव मा, फेर कभू तैं मोर जी।।

गाँव गली अउ खोर मा,लइका मन के शोर जी।
सूरज लाली देख के,सुघ्घर लगथे भोर जी।।

कौंआ बइठे छानही,करत हवय गा काँव ले।
आही घर मा जी सगा, देखत हंवव गाँव ले।।

जब ले गे हे ओ शहर,आथे ओकर याद जी।
राहन दूनो साथ मा,मिलबो बड़ दिन बाद जी।।

राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद।

चौपई छंद

।। चौपई छंद ।।
जय हो मइया जय हो तोर,सुनले विनती तैंहर मोर।
करदे किरपा दाई थोर,आय शरण मा हांवव तोर।।

मैं तो लइका तोर नदान, देदे मोला तै वरदान।
बेटा मोला अपने जान,निसदिन करहूँ तोर धियान।।

महिमा ला ओ रोजे गांव,जस ला तोरे मैं बगरांव।
देबे अँचरा मोला छांव,तोर मया ला मैं हर पांव।।

तोर शरण मा मनखे आय,आके ओमन माथ नवाय।
पान फूल ला धरके लाय, करके पूजा तोर चढ़ाय।।

घर घर मा हे तोरे वास,रहिथस तैं हा सबके पास।
करय तोर जे बिसवास,होवय पूरा ओकर आस।।

✍ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ✍

कज्जल छंद

कज्जल छंद   राजेश कुमार निषाद

मनखे मनखे बने जोड़।
भेद भाव ला अपन छोड़।
आथे कतको राह मोड़।
झन तैं सबले नता तोड़।

सबला संगी अपन जान।
झन कोनो मा भेद मान।
दू दिन के सब सगा तान।
एक सबो के हवय जान।

माटी के तन हवय तोर।
सुनले संगी गोठ मोर।
रखले गठरी बाँध जोर।
छूट जही कब प्राण तोर।

भरम भेद के अपन खोल।
बात मान ले झने डोल।
जिनगी के तैं समझ मोल।
मोह मया मा झने तोल।

रचनाकार- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...