सोमवार, 29 जून 2020

माँ का आँचल

।। माँ का आँचल।।
कलकल करती मधुर ध्वनि,
गीत प्रेम की गाती है।
माँ के आँचल जैसा कहीं नही,
जब ओ लोरी गा के सुलाती है।
जब जब मैं रोता हूँ ,
झट से मुझे उठा लेती है।
चुप न मैं जब होता हूँ,
तो अपने सीने से लगा लेती है।
मेरे नखरों को कितना सहन करती है,
फिर भी ओ मुझे अपने पास रखती है।
मुझको मुन्ना राजा कहकर,
माँ हमेशा बुलाती है।
माँ के आँचल जैसा कहीं नही,
जब ओ लोरी गा के सुलाती है।
मैं छोटा बच्चा आँख का तारा हूँ,
अपने माँ का मैं लाडला प्यारा हूँ।
जब जब मेरे किलकारी,
गुंजता है घर में ।
मेरे रोने की आवाज सुनकर,
माँ दौड़े आती है पल भर में।
समझ तो नही है मुझमें ,
पर बदमाशी न कर बेटा कहती है।
माँ के आँचल जैसा कहीं नही,
जब ओ लोरी गा के सुलाती है।

रचनाकार :-  राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद
रायपुर छत्तीसगढ़

रविवार, 28 जून 2020

कोरोना पर जागरण

।।आल्हा छंद।।
कोरोना पर जन जागरण 

घुमव फिरव झन बाहिर जादा, राहव घर मा सबझन साथ।
कोरोना ले बचहू भइया, धोवव घेरी बेरी हाथ।।

करो सफाई कोना कोना,घर के अपन सबो हा आज।
मिलके हाथ बटावव संगी,करव नही गा थोरिक लाज।।

दुरिहा दुरिहा सबझन राहव,अइसन डॉक्टर बात बताय।
बचबो कोरोना ले भइया, करबो जब ये हमन उपाय।।

जावव झन गा काम बुता मा,कोरोना ले तो डर जाव।
घर के भीतर रहिके संगी,जान अपन गा सबो बचाव।।

बासी खाना ला झन खाहू, खावव बढ़िया ताते तात।
गरम गरम गा पीहू पानी,तब तो जाके बनही बात।।

मिलना जुलना बंद करव अब,छोड़व सबो मिलाना हाथ।
आवत जावत गली खोर मा,राखव गमछा हरदम साथ।।

आय महामारी जी येहर,रोग भयंकर भारी जान।
हल्का मा झन लेवव येला,लेवत हावय सबके प्राण।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद (समोदा) जिला रायपुर छत्तीसगढ़

छप्पय छंद

काटत हावय पेड़,कहाँ ले छइयाँ पाबो।
बिना पेड़ के आज,हवा बिन सब मर जाबो।।
नइ बच ही जब पेड़,धरा बंजर हो जाही।                                           बढ़ जाही बड़ ताप,छाँव बर सब पछताही।।

।।राजेश कुमार निषाद।।

आल्हा छंद साफ सफाई

।। आल्हा छंद।।
साफ सफाई सपना होगे, देवव अब तो सबो धियान।
आओ मिलके हाथ बँटाबो,नवा चलाबो गा अभियान।।

घर अँगना के करो सफाई,कोना कोना दिखही साफ।
जतर कतर मत फेंको कचरा,करय नही गा कोनो माफ ।।

जमा करो गा एक जगा सब,डालो कचरा कूड़ेदान।
पचर पचर मत थूको संगी,खाके गुटखा पाउच पान।।

घर घर मा  बनही शौचालय, जाहू झन गा बाहर आज।
बात बताहू सबला संगी,करही बहु बेटी झन लाज।।

आदत बनही सबके संगी, जाही लइका बुढ़ा जवान।
देख सफल हो जाही हमरो,हमन चलाबो जो अभियान।।

मंदिर मसजिद अउ सचिवालय,करो सफाई मिलके रोज।
होय सफाई तन के भितरी, फेंकव मनके कचरा खोज।।

गली गली मा जाके संगी,मिलके करबो सब परचार।
साफ रखव सब गली खोर ला,इही हवय गा जीवन सार।।

राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा तहसील आरंग जिला रायपुर छत्तीसगढ़
8770649541

आल्हा छंद मैं बनिहार

मैं बनिहार ( आल्हा छंद )
बड़े बिहनिया जाथँव संगी,काम बुता मा मैंहर रोज।
घर के संसो छाये रहिथे,जाके करथँव दिनभर खोज।।

एती ओती जाके करथँव,काम बुता ला मैं बनिहार।
जब थक हारे घर मा आथँव,हो जाथे गा बड़ अँधियार।।

बड़ करलाई हावय भइया, देखव लइका मनके मोर।
रोजी रोटी बर मैं लड़थँव,अपन कमाथँव जाँगर टोर।।

घाम प्यास ला मैं नइ देखँव,करथँव काम बुता दिन रात।
लाँघन भूखन झन राहय जी,लइका मनहा सोचँव बात।।

भरे मझनिया करते रहिथँव,नही कभू मैं खोजँव  छाँव।
लक लक तीपे रहिथे भुइयाँ,चट ले जरथे मोरो पाँव।।

कभू खनव मैं माटी गोदी,अउ ढेला पथरा ला फोड़।
महल अटारी घलो बनाथँव,रच रच ईंटा मैंहर जोड़।।

टप टप चूहे भले पसीना,राहय खुश मोरो परिवार।
जउन बुलाही काम बुता मा,जाके करहूँ मैं बनिहार।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद (समोदा) जिला रायपुर छत्तीसगढ़

गरमी के दिन

।।गरमी के दिन ।।

सुनले  सूरज हे भगवान,काबर  करथस तैं हलकान।
आथव बड़े बिहनिया आप,बड़गे हावय अड़बड़ ताप।    
                                                      
आगी जइसन करथस घाम, उसना जावत तन के चाम। 
होगे होही कोनो पाप,करबो देवा तोरोे जाप।।

गरमी के दिन जब जब आय,तरिया नदियाँ सबो अटाय।
गरमी ले हे सब थर्राय, कूलर पंखा काम न आय।।
                                 
भुइयाँ मा चट जरथे पाँव, तन हा खोजत रहिथे छाँव।।
घेरी बेरी गला सुखाय,अबड़ पछीना हा चुचवाय।।      
                                                     
ज्ञानी मनखे ज्ञान सुझाय,नेकी के वो बात बताय।
पेड़ लगा के करो उपाय,जेकर से सब राहत पाय।।                                                          

बरसा के जल सबो बचाव, तरिया डबरी बाँध बनाव।।
बंद करव प्लास्टिक उपयोग, तभे दूर ये होही रोग।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...