बुधवार, 1 सितंबर 2021

।।अखबार।।

रोज सुबह उठके सभी,पढ़ते हो अखबार।
खबरें देखो आज की,कितना है दमदार।।

कहाँ कहाँ क्या हो रहा,किसने कर ली खोज।
मिले जानकारी सभी, पढ़ते है जी रोज।।

दुनिया भर की है खबर,इनमें छपते जान।
पढ़ो सभी अखबार को,कहना मेरा मान।।

पढ़ता जो अखबार को, बढ़ता उसका ज्ञान।
खबर काम का है यहाँ, पढ़ो लगाकर ध्यान।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम  चपरीद रायपुर

।।गुरु के कहना मान।।

।।चौपई छंद।।
गुरु के कहना तैंहर मान, गुरु हा देथे सबला ज्ञान।
हवय दया के सागर जान,जग के हावय वो भगवान।।

अँधरा मन के आँखी आय,भटके ला वो राह बताय।
जउन शरण मा गुरु के जाय,वोहर कभू न धोखा खाय।।

गुरु सेवा मा लगा धियान, तब तो पाबे चोखा ज्ञान।
गुरु के महिमा भारी जान,देही तोला वो वरदान।।

गुरु के सेवा मा सब जाय, नइ तो छोटे बड़े कहाय।
सबला चोखा रहे बनाय,खोटा सिक्का तक चल जाय।।

मिले सहारा गुरु के तीर,रखले मनवा तैंहर धीर।
बदल जही तोरो तकदीर,हरथे गुरु हा सबके पीर।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर 

आजादी परब मनाबो

।।आजादी परब मनाबो।।
चलव चलव सब दीदी भइया,आजादी परब मनाबो।
तीन रंग के धजा तिरंगा,मिलके हम सब फहराबो।।

गली गली मा योद्धा मन के,करत घूमबो जयकारा।
धरे हाथ मा धजा तिरंगा,लगही सुघ्घर बड़ प्यारा।।

आजादी पाए बर कतको,वीर बनिन हे बलिदानी।
कइसे हमन भुलाबो संगी,वोकर मन के कुर्बानी।।

अंग्रेजन ले मुक्त करे बर,पुरखा मन खाइन गोली।
हाँसत झुलगे जब फाँसी मा,कतको वीरों की टोली।।

गोली से अब हमन खेलबो,फाँसी मा भी चढ़ जाबो।
जब तक साँस हमर हे तन मा,बइरी ला मार भगाबो।।

जेन देश हा आँख उठाही,वोला चुर चुर कर जाबो।
कतको आही चाहे विपदा,मन मा हम नइ घबराबो।।

चलव चलव सब दीदी भइया, आजादी परब मनाबो।
तीन रंग के धजा तिरंगा,मिलके हम सब फहराबो।।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर (छ. ग.)

भारत माँ के बेटा

।।आल्हा छंद -  भारत माँ के बेटा।।

भारत माँ के बेटा संगी,अपन कभू नइ मानव हार।
वीर वंश के मैं बलिदानी,देवय चाहे मोला मार।।

चढ़के संगी सरहद मैं हर,खड़े रहूँ जी सीना तान।
बइरी मन ला मार गिराहूँ, चाहे छूटे मोरो प्राण।।

जब जब बइरी आँख दिखाही,खींच उठा हूँ जी तलवार।
शोला बनके कहर बरस हूँ, भागय बइरी सुन ललकार।।

सरहद मा जी गोला बरसे,होवय गोली के बौछार।
अपन कदम ला कभू न रोकँव, भरके लड़हूँ मैं हुंकार।।

मरदानी झाँसी की रानी,भरथे मोरो अंदर जोस।
लड़ जाहूँ मैं बइरी मन से,बनके वीर सिपाही बोस।।

गाँधी भगत तोर कुरबानी, राखे हाँवव मैं हर याद।
कइसे आज भुलाहूँ ये दिन,होइस हमर देश आजाद।।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़।

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...