रविवार, 12 जुलाई 2015

पढ़ाई ल झन छोड़व रे संगी

पढ़ाई ल झन छोड़व रे संगी

पढ़ाई ल झन छोड़व रे संगी
छोड़े में हे घाटा रे ।
तै पढ़बे लिखबे संगी
हमला देबे का बांटा रे ।
खेत म जाबे गढ़बे कांटा रे
घर में बनाबे तै चाय आंटा रे ।
पढ़ाई ल झन छोड़व रे संगी
छोड़े में हे घाटा रे ।
पढ़ लिख के बनबे तै
एक दिन बाबू साहब ।
हो जाबे तै गाता रे ।
पढ़ाई ल झन छोड़व रे संगी
छोड़े में हे घाटा रे ।

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