बुधवार, 29 जुलाई 2020

मुक्तक के नियम

*।। मुक्तक क्या है।।* 

जो काव्य विधा भाव के दृष्टिकोण से अपने आप में पूर्ण हो वह मुक्तक कहलाता है।

जैसे *- दोहा ,शेर आदि* 
 दो पंक्ति के दोहा अपने आप में कथन या भाव की दृष्टिकोण से पूर्ण होता है।ठीक उसी प्रकार से शेर भी दो पंक्ति के माध्यम से कह देता है। इसलिए यह सैद्धांतिक रूप से मुक्तक है।किन्तु यह बात ध्यान देने योग्य है, वर्तमान में प्रचलित मुक्तक इससे भिन्न है।लोग बाग जिसे मुक्तक समझ रहे है वह उर्दू साहित्य से तालुकात रखता है।उर्दू साहित्य के गजल के मतला के साथ मतलासानी चिपका हो तो उसे मुक्तक कहते है।

गजल के प्रथम दो पंक्ति को मतला और उसके बाद आने वाले दो पंक्ति को मतलासानी कहा जाता है।
 *मुक्तक* एक समान मात्रा भार और समान लय (समान बहर) वाले चार पदों की रचना है जिसका *पहला*, *दूसरा* और *चौथा* पद तुकान्त तथा *तीसरा* पद  अतुकान्त होते है और जिसकी अभिव्यक्ति का केंद्र अंतिम दो पंक्तियों में होता है।

 *मुक्तक के लक्षण*
1. इसमें चार पद होते है।

2. चारों पदों के मात्रा भार और लय(या बहर) समान होते है।

3. पहला दूसरा और चौथा पद में रदीफ काफिया अर्थात सैम तुकान्तता होता है।

4. जबकी तीसरा पद अनिवार्य रूप से अतुकान्त होते है।

5. कथ्य कुछ इस प्रकार होता है कि उसका केंद्र बिंदु उसके अंतिम दो बिंदुओं में रहता है।जिनके पूर्ण होते ही पाठक/श्रोता वाह करने पर बाध्य होता है।

6. मुक्तक की कथन कुछ कुछ गजल के शेर या दोहा छंद जैसी होती है,इसे वक्रोक्ति व्यंग्य या अंदाज ए बयाँ के रूप में देख सकते है।

 *मुक्तक* में हमें तीन शब्दों से परिचित होना आवश्यक है।
       
      1. *रदीफ* 
रदीफ अरबी शब्द है इसकी उतपत्ति " रद"  धातु से मानी गयी है। रदीफ का शाब्दिक अर्थ है पीछे चलने वाला या पीछे बैठा हुआ।
गजल के संदर्भ में रदीफ उस शब्द या समूह को कहते है जो मतला ( पहला शेर ) के मिसरा ए उला (  पहली पंक्ति ) और मिसरा ए सानी

 *उदाहरण* :-
हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए।
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
मेरे सीने में नही तो तेरे सीने में सही।
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।     (दुष्यंत कुमार जी की रचना है )
प्रत्येक पंक्ति के अंत मे जो शब्द आता है उसे रदीफ कहते है।
जैसे इसमें  अंतिम शब्द  चाहिए आया है वह इसका रदीफ कहलायेगा ।

2. *काफिया* 

काफिया अरबी शब्द है जिसकी उत्पत्ति "  कफु "  धातु से मानी जाती है। काफिया का शाब्दिक अर्थ है जाने के लिए तैयार। गजल के संदर्भ में काफिया वह शब्द है जो सम तुकांता के साथ हर शेर में बदलता रहता है, यह गजल के हर शेर में रदीफ के ठीक पहले स्थित होता है जबकि मुक्तक पहले, दूसरे, एवं चौथे पंक्ति में। 
जैसे  
पिघलनी, निकलनी, और जलनी में अनी शब्द आया है।

 *उदाहरण* 

आँसुओं का समंदर सुखाया गया।
अंत में बूँद भर ही बचाया गया।
बूँद वह गुनगुनाने लगी ताल पर।
तो उसे गीत में ला छुपाया गया।

इसमें  सुखाया, बचाया और  छुपाया शब्द में आया शब्द आया है वह काफिया है।
  
    *बहर* 
मात्राओं के क्रम को ही बहर कहा जाता है। जिस प्रकार हिन्दी में गण होता है उसी प्रकार उर्दू में रुकन होता है।

   *मात्रा* 
मात्रा दो प्रकार की होती है
(1)  एक मात्रिक इसे हम एक अक्षरिय व एक हर्फ़ी व लघु व लाम भी कहते है और 1 से अथवा हिन्दी कवि 1से भी दर्शाते है।
(2) इसे हम दो अक्षरिय व दो हरुफी व दीर्घ व गाफ भी कहते है।

 *एक मात्रिक*
हिंदी वर्णमाला में
अ, उ,इ, ऋ और इससे जुड़े व्यंजन 
अ, क,ख, कृ खृ,कँ, खँ

 *दो मात्रिक* 
आ,ई,ऊ, ए ,ऐ औ अं
इससे जुड़े हुए व्यंजन जैसे
का,की, कू,के, कै,को,कौ कं आदि 

आधा वर्ण का खुद का कोई भार नही होता किन्तु जिससे जोड़कर इसे बोला जाता है उसका भार दीर्घ या गाफ हो जाता है।
 *उदाहरण* 
 *राम* - 21
 *श्याम* - 21
 *कृष्ण* - 21
 *तुम्हारा* -122
 *हमारा* -122
 *संसार* -221
 *खुशी* -12
 *कमल* -111 (12) जबकि इसी शब्द को  उच्चारण की दृष्टि से मल को शास्वत गुरु मानकर 2 कर दिया जाता है।
 *उधर*  -111(12)

आँसुओं का समंदर सुखाया गया।
2  1  2  2   12 2   1 22   12
अंत में बूँद भर ही बचाया गया।
21  2  21   2  2  122   12
बूँद वह गुनगुनाने लगी ताल पर।
21  2    2122   12   21  2
तो उसे गीत में ला छुपाया गया।
2   12  21  2  2  122   12

जब चारो पंक्ति की मात्रा क्रम एक समान हो बहर एक समान हो 
तभी वह मुक्तक होगा।
सभी के अंत में रदीफ तीन पंक्तियों में रदीफ आयेगा और एक पंक्ति रदीफ मुक्त होगा और रदीफ के पहले काफिया  आयेगा तो उसे कलात्मक रूप से मुक्तक कहेंगे।



उपरोक्त जानकारी गुरु भैया रमेश सिंह चौहान के अनुसार.....

संग्रहनकर्ता:- राजेश कुमार निषाद

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