दोहा नारी जग की तारणी
1. नारी ममता रूप है,करो सभी जी मान।
नारी जग की तारिणी, नारी होत महान।।
2. दो कुल में दीपक जला, करती है उजियार
घर मा नारी के बिना,सुना हे परिवार।।
3. करती भव से पार माँ, जब जब आफत आय।
दुर्गा लक्ष्मी शारदा, बन के ओ डट जाय।।
4. नारी जग की तारिणी,करो नही अपमान।
नारी जीवन दायनी,करो सभी सम्मान।।
5. नारी रूप अनेक हे, जग में ली अवतार।
सेवा नारी के करो,पूजे सब संसार।।
रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद रायपुर छत्तीसगढ़
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