गुरुवार, 16 अगस्त 2018

तिहार होली


।। तिहार होली ।।
फागुन के महीना आये हे तिहार होली।
रंग गुलाल लगा के संगी करबो हंसी ठिठोली।
लईका मन खेलय पिचकारी
संगी जहुरिया मन लगाय गुलाल।
दिन भर गली म चहल पहल राहय
गांव लागे बड़ खुशहाल।
गोठियाथे ग सब मया प्रित के बोली।
फागुन के महीना आये हे तिहार होली।
गली गली म बाजे नगाड़ा
गीत होली के गाये।
एक दूसर से बैर छोड़ के
सब ल हाथ मिलाये।
झूम झूम के नाचे सब खाये भांग के गोली।
फागुन के महीना आये हे तिहार होली।
दिन भर खेले रंग गुलाल
सांझकुन पहिने सब नवा कपड़ा।
घर घर रोटी पिठा चुरे
नई होवय कोनो झगड़ा।
आनि बानि के रोटी चुरय
महर महर ममहाय सबके घर के खोली।
फागुन के महिना आये हे तिहार होली।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

बेटी ला भी दव शिक्षा अउ संस्कार


।। बेटी ल दव शिक्षा अऊ संस्कार  ।।
कोनो अपन बेटी  ल देवव झन मार,
बेटी ल  घलो बेटा बरोबर करो प्यार।
बेटी बर घलो बने होहि ये संसार,
बेटी ल भी  दव शिक्षा अऊ संस्कार।।

             जब तुमन थके मांदे घर म आथव,
              त बेटी ह सब ल हंसाथे।
                बेटी बर तुमन मया नई करव,
              तभो ले वोहा अपन मया लुटाथे।
              मान लव तुमन बेटी ल बेटा बरोबर
              अपन जीवन के अधार।
              बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।।

बेटी हरय घर के लक्ष्मी,
सबो के चिंता ल दूर करथे जी।
सबके राजदुलारी बिटिया रानी,
घर आँगन ल महकाथे जी।
येकरे ले तो सजथे ग घर अऊ दुवार
बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

              बेटी जनम धरे हावय जग मा,
              घर घर म जाके ये भरम मिटाही।
              बेटी कभू काकरो बर बोझ नइ होवय,
              सब समाज मा ये अलख जगाही।
              जेन बेटी ले मया करे बर नई जानय,
              ओकर जीना हावय ग धिक्कार।
              बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

कहिथव न की नारी पढ़ही
त विकास करही।
या पढ़ा लिखा दव नारी ल
एक लईका के महतारी ल।
बेटी बेटा म भेद झन करव
लावव ग नवा विचार
बेटी ल  भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

ढेकी


           ।।  ढेकी  ।।
जब ले मशीनी युग ह आये हावय
नंदागे हावय घर घर के ढेकी।
जेमा चाउंर ल कुटय
अऊ रांधय अईरसा रोटी।
धानकुट्टी मिल के नई राहय ले
धान ल येमा कुटय।
रेंच रेंच ढेकी बाजय
डोकरी दाई चाउंर ल फुनय।
ढेकी गढ़े राहय घर के दुवारी
जेमा गुण हावय बड़ भारी।
 बचे मैरखु ल फिर से कुटथे
मेहनत जादा हे कहिथे।
फेर जब ले मशीन आय हावय
ढेकी के काम नंदागे।
सब काम मशीन म जल्दी होथे
बस दो मिनट काहत लागे।
जेकर घर ढेकी राहय
ओकर घर पारा पड़ोस के मन आवय।
सब अपन अपन धान ल कुटय
पर ढेकी के गुण ल गावय।
ढेकी घर के दुवारी के
अब हिस्सा होगे हावय।
अब के लईका मन बर
कहानी अऊ किस्सा होगे हावय।

रचनाकार  राजेश कुमार निषाद
              ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा तह. आरंग जिला रायपुर छत्तीसगढ़

देश बर जीबो देश बर मरबो


।। देश बर जीबो संगी देश बर मरबो ।।
भारत मां के बेटा हरन
देश बर जीबो संगी देश बर मरबो।
देश की रक्षा करे खातिर
बईरी मन से लड़ जाबो।
देश ल आजाद कराये खातिर
पुरखा गोली खाईस अपन छाती म।
नव जवान लईका सियान
सब हांसत झुलगे फाँसी म।
फेर हमन काबर पछुआबो
भारत मां के बेटा हरन
देश बर जीबो संगी देश बर मरबो।
जेन देश ह हमर देश बर आंखी उठाही
ओला हमन चुर चुर कर जाबो।
चाहे आंधी आही या तूफान आही
पर हमन नई घबराबो।
देश ल अजाद करईया पुरखा के
सुरता ल हमन गाबो।
भारत मां के बेटा हरन
देश बर जीबो संगी देश बर मरबो।
गांधी भगत के कुरबानी ल
कईसे हमन भुलाबो।
जब तक रही सांस हमर
बईरी ल मार भगाबो।
तीन रंग के तिरंगा झंडा
मिलके हमन फहराबो।
भारत मां के चरण म
माथ अपन नवाबो।
भारत मां के बेटा हरन
देश बर जीबो संगी देश बर मरबो।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
 ग्राम चपरीद ( समोदा )
 9713872983

ले जा मोर राखी के संदेसा


 ।।  ले जा मोर राखी के संदेसा ।।
ले जा मोर राखी के संदेसा,ये मयारू मैना मोर।
राखी तिहार आगे हे तीर मा,तै मोला झन अगोर।
बड़ दुरिहा म रहिथे मोर भईया,मोला सोरियावत होही।
बहिनी के मया ल भुलाही कईसे,घर मा गोठियावत होही।
धीरे धीरे जाबे  रेे मैना,झन करबे तैैंहर जादा शोर।
ले जा मोर राखी के संदेसा,ये मयारू मैना मोर।
खेलई कुदई ल कईसे भुलावंव, मैं हर लईका पन के।
भईया मोर राहय संगवारी, सुरता आवत बचपन के।
तीर म राहंव  भइया के,मयाा दुलार ल पावँव।
राखी के तिहार मा ,भइया केे कलाई  म राखी बांधँव।
जाके भइया ल कहिबे, सुरता करत रहिथे बहिनी तोर।
ले जा मोर राखी के संदेसा, ये मयारू मैना मोर।
राखी  के तिहार  हा, साल म एकेच बार आथे।
पर भाई बहिनी के मया ल कोनो कहाँ भुलाथे।
बड़ सुघ्घर रखी के तिहार,पावन तिहार कहाथेे।
बहिनी के रक्षा  करे बर, वचन भाई ह निभाथे।
अइसे लगत हे मोला, देख आतेंव भईया ल मोर
ले जा मोर राखी के संदेसा,ये मयारू मैना मोर।
राखी तिहार आगे हे तीर मा,अब तै मोला झन अगोर।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )रायपुर छहत्तीसगढ़.

मुक्तक


       मुक्तक

पहिली पुजा के तै अधिकारी गणेशा
तोला भाथे लाड़ू हा भारी गणेशा
करथस सबके आशा ला पूरा गजानन
तोला ग कहिथे सब मंगलकारी गणेशा
 
 मोरो पीरा ल तै हरबे गजानन
 मोरो रक्षा ल तै करबे गजानन
 सबले पहिली ग तोला गोहराथन
दुनिया मा सुख ल तै भरबे गजानन

रचनाकार - राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद
(समोदा )

मोर छत्तीसगढ़ महतारी



   ।। मोर छत्तीसगढ़ महतारी ।।

चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।
ये परदेशिया मन कतका राज करही अऊ कतेक जुलुम साहिबो येकर अत्याचारी के।
चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।

खाली हाथ आय रहिन बस हाथ में धर के झोरा।
लूट लूट के लेगत हे ये मन अब बोरा बोरा।
देखव परदेशिया के चाल कईसे हमन ल मुरख बनावत हे।
हमर महतारी के कोरा म आके हमी ल टुंहु देखावत हे।
अईसन मउका झन आवय सुध रखव राज दुलारी के।
चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।

छत्तीसगढ़ महतारी के लाज बचाये बर गोली खा लेबोन छाती म।
नवजवान लईका सियान सब हाँसत झूल जाबो फासी म।
अईसन लड़ाई लड़बो हमन जप के नाम बलिहारी के।
चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।
भाई चारा के पाठ ल मिलजुल के सब ल पढ़ाना हे।
मन म एक ही बात ठानव छत्तीसगढ़ महतारी के लाज बचाना हे।
मिलजुल के तुमन रहे बर सिखव फेर देखव का हाल होही ये मालगुजारी के।
चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।

कतेक सुघ्घर हावय छत्तीसगढ़िया मनखे मन
फेर देखव शासन हावय काकर ग।
दया मया येकर मन कस अऊ कहूँ नई मिलय
चाहे दुनिया म देखव तुमन जाकर ग।
दुरिहा राहव ये परदेशिया मन ले
नइये ये मन हमर चिन्हारी के।
चलव संगी चलव साथी लाज बचाबो मोर छत्तीसगढ़ महतारी के।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद( समोदा )
9713872983

गरमी मा स्कूल


  ।। गरमी म स्कूल ।।

छोटे से लईका संगी जाथे गरमी म स्कूल।
तात तात झांझ चलथे अऊ उड़थे धूल।

गला म अरोय पानी डब्बा पीठ म बस्ता भारी।
स्कूल जाही बेटा कहिके दाई करथे तईयारी।

स्कूल के आंगन म सुंदर सुंदर पेड़ लगे हे।
पेड़ म सर्व शिक्षा अभियान के तख्ता टंगे हे।

स्कूल के तिरे तिर लगे हे सुंदर गेंदा फूल।
छोटे से लईका संगी जाथे गरमी  म  स्कूल ।

गुरुजी पढ़ावत रहिथे स्कूल के अंदर म।
लईका मन खेलत रहिथे स्कूल के बाहर म।

स्कूल के खेल घलो हावय बड़ा अजब ग।
लईका मन में पढ़े बर उत्साह  हे गजब ग।

पढ़ाई लिखाई म लईका मन नई करत हे भूल।
छोटे  से लईका संगी  जाथे गरमी म स्कूल।

आनी बानी के किताब कॉपी धरके स्कूल जाथे।
स्कूल म पढ़े पाठ ल घर म दाई ददा ल बताथे।

स्कूल म गुरुजी आनी बानी के पाठ पढ़ाथे।
लईका मन के ज्ञान ल ओ हर जादा बढ़ाथे।

नई मानय गुरुजी के बात देखाथे डंडा अऊ रूल।
छोटे से लईका संगी जाथे गरमी म स्कूल।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा तहसील आरंग
जिला रायपुर छत्तीसगढ़ 493441
9713872983

जय छत्तीसगढ़ महतारी

जय छत्तीसगढ़ महतारी
तोर बोली ल बगराबो मिलके सब संगवारी
निक लागे हमर बोली भाखा
रखथन सबो से सुघ्घर नाता
हंसी मजाक अऊ ठिठोली
अईसन सुघ्घर हमर छत्तीसगढ़ी बोली
तोर माटी  म खेती किसानी करय सब बनिहारी
जय छत्तीसगढ़ महतारी
तोर बोली ल मिलके बगराबो सबो संगवारी
दया मया के सुरता राखे रहिथस मन म
छत्तीसगढ़िया तोर बेटा रखबे अपन संग म
महकन दे तोर फुलवारी
जय छत्तीसगढ़ महतारी
तोर बोली ल बगराबो मिलके सबो संगवारी
जनम धरे हन तोर कोरा म देबे तै दुलार वो
तोर बोली ल दाई जग म पारत हंव गोहार वो
तोर बगिया  म दिखे सब बनके राधा अऊ बनवारी
जय छत्तीसगढ़ महतारी
तोर बोली ल बगराबो मिलके सबो संगवारी

राजेश  कुमार निषाद ग्राम चपरीद

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

आल्हा छंद

।।आल्हा छंद।।

भारत माँ के बेटा संगी,अपन कभू नइ मानव हार।
वीर वंश के मैं बलिदानी, देवय चाहे मोला मार।

चढ़के संगी सरहद मैं हर, खड़े रहूँ जी सीना तान।
बइरी मन ला मार गिराहूं,चाहे छूटे मोरो प्राण।

जब जब बइरी आँख दिखाही,खींच उठा हूँ जी तलवार।
शोला बनके कहर बरस हूँ, भागय बइरी सुन ललकार।

सरहद मा जी गोला बरसे,होवय गोली के बौछार।
अपन कदम ला कभू न रोकँव,भरके लड़हूँ मैं हुंकार।

मरदानी झांसी की रानी, भरथे मोरो अंदर जोस।
लड़ जाहूँ मैं बइरी मन से,बनके वीर सिपाही बोस।

गाँधी भगत तोर कुरबानी, राखे हाँवव मैं हर याद।
कइसे आज भुलाहूँ ये दिन,होइस हमर देश आजाद।

राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा तहसील आरंग जिला रायपुर (छ. ग.)

शनिवार, 11 अगस्त 2018

बदलाव नवा साल म


।। बदलाव नवा साल म ।।
जगह जगह म घटना घटत हे
देखव कईसन हाल म।
सोचव  सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
दिनो दिन मंहगाई बढ़त हे।
भाई भाई एक दूसर से लड़त हे।
गरीब मनखे मन बर करलई होगे।
अब के सरकार निरदई होगे।
मंहगाई बढ़ा दिस दाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
पढ़े लिखे मन बेगारी करत हे।
अनपढ़ मन हिस्सेदारी बर लड़त हे।
जगह जगह म भुइंया के बटवारा होवत हे।
अईसन भरे दलाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
गली गली म पानी बोहावत हे
चिखला माते हे भारी।
घर घर म नल लगावत हे
एक दूसर ल देवत हे गारी।
आरा पारा सबो पारा रमे हे सब बवाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
दाई ददा ल संसो नई हे
बेटा घुमक्कड़ होगे।
काम बुता के फिकर नई हे
ददा पियक्कड़ होगे।
जिनगी कटत हे येकर बुरा हाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।

रचनाकार  ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

नवा बछर के बधाई

।।नवा बछर के बधाई।।

गांव गली खोर म
लईका मन के शोर म।
होवत बिहनिया बने लागथे
चिरई मन के चहचहई।
नवा बछर के गाड़ा गाड़ा बधाई।
सुख दुःख कतको आईस
बीते बछर लेगे अपन संग म।
अईसन खुशी मनबो संगी
डुबके नवा बछर के रंग म।
खाबो पेड़ा अऊ बांटबो मिठाई
नवा बछर के गाड़ा गाड़ा बधाई।
जतन करो रे दाई ददा के
इहि जीवन के आधार म।
जनम धरे हस इहि भुइयां म
कुछु नई हे मोहमाया के संसार म।
बनके बनिहार करव सबके भलाई।
नवा बछर के गाड़ा गाड़ा बधाई।
मिलजुल के सब काम करव
नवा बछर के खुशहाली म।
पेड़ लगावव जतन के
सुन्दर दिखहि हरियाली म।
प्रण अईसन ठानव महकन दव अमराई
नवा बछर के गाड़ा गाड़ा बधाई।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद (समोदा )
9713872983

खेल हमर नंदागे


।। खेल हमर नंदागे ।।
जब ले सिनेमा आगे ग
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।
बड़े बिहनिया गली खोर म खेलन भऊरां बाटी।
रेस्टिप अऊ छू छुऔल खेलन सब संगी साथी।
कहाँ पाबे अब ओ खेल ल
सब क्रिकेट म झपागे ग।
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।
कतेक सुघ्घर लागे  दीदी बहिनी मन के खेलई  फुगड़ी  गोटा अऊ बिल्लस।
हमन खेलन तिरीपसा तिग्गा अऊ राहन बिंदास।
पर आज के महिला  सीरियल में मोहागे ग।
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।
गुल्ली डंडा के बात निराला
डंडा पचरंगा खेलन धूप म।
भरे मंझनिया तरीया म डुबकन कुदन चढ़ के रुख म।
पर ओ दिन ल अब कहाँ ले लाबे ग।
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।
पिट्ठूल खेलन खपरा सकेल के।
छुक छुक रेलगाड़ी खेलन एक दूसर ल ढकेल के।
गिरत पानी म कागज के डोंगा चलान।
पानी ल छेक के पीपर पान के तुरतुरी लगान।
अईसन खेल अब कहाँ पाबे ग
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।
निम फर  अऊ बमरी काँटा के ढेलवा झूला बनान।
बर पत्ता के फिलफिलि बना के उड़ान।
कच्चा माटी के दिया बना के फोड़न।
चौरा म खड़ा होके नदी पहाड़ खेलन।
खो खो कबड्डी खेले बर नाम अपन बताबे ग।
जुन्ना खेल हमर नंदागे ग।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

ले जा मोर राखी के संदेसा


 ।।  ले जा मोर राखी के संदेसा ।।
ले जा मोर राखी के संदेसा
ये मयारू मैना मोर।
राखी तिहार आगे हे लकठा
अब तै मोला झन अगोर।
बड़ दुरिहा म रहिथे मोर भईया
ओ हर मोला सोरियावत होही।
बहिनी के मया ल भुलाही कईसे
संगी जहुरिया करा अपन गोठियावत होही।
धीरे धीरे जाबे झन करबे तै सोर
ले जा मोर राखी के संदेसा
ये मयारू मैना मोर।
खेलई कुदई कईसे भुलावंव मैं लईका पन के।
भईया मोर राहय संगवारी बरोबर बचपन के।
तीर म राहंव त मया दुलार ल पावंव।
राखी के तिहार म हाथ म राखी बांधव।
जाके भईया ल मोर कहिबे
बड़ सुरता करत रहिथे बहिनी तोर।
ले जा मोर राखी के संदेसा
ये मयारू मैना मोर।
राखी तिहार साल म एकेच बार आथे
पर भाई बहिनी के मया ल कोनो कहाँ भुलाथे।
दाई ददा ले तो जनम पाये हन
बहिनी के रक्छा  करे के वचन भाई ह निभाथे।
अइसे लगत हे मोला देख आतेंव भईया ल मोर
ले जा मोर राखी के संदेसा
ये मयारू मैना मोर।
राखी तिहार आगे हे लकठा
अब तै मोला झन अगोर।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
                ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

माटी के मितान


             ।। माटी के मितान ।।
नागर बईला धर के निकलथस
कहलाथस तै किसान ग।
खाय पिये के सुरता नई राहय
निकलथस तै होवत बिहान ग।
तोला कहिथे माटी के मितान ग।
नुन चटनी म तै खाथस बासी ग
गिरत पानी म करथस बियासी ग।
तोर मेहनत म परिया घलो हरीयागे
सुघ्घर दिखे खेत खलिहान ग।
तोला कहिथे माटी के मितान ग।
खून पसीना ल तै ह एक करके
जांगर टोर कमाथस ग।
बंजर भुईयां म नागर चला के
अन्न तै उगाथस ग।
तोर मेहनत हावय तोर पहिचान ग
तोला कहिथे माटी के मितान ग।
नागर बईला तोर संगवारी
सबके पालन पोषण करथस ग।
तोर ले बढ़ के दुनिया म कोनो नइये
सबके भाग तै जगाथस ग।
सरग बरोबर भुईयां के तै भगवान ग।
तोला कहिथे माटी के मितान ग।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
                  ग्राम चपरीद ( समोदा )

सोमवार, 9 जुलाई 2018

।। उल्लाला छंद ।।

।। उल्लाला छंद।।
होवत बिहना रोज के,कुकरा करथे शोर जी।
बिहना उठ के देख लव, गजब सुहाथे भोर जी।।

आबे संगी मोर जी,मंदिर हावय गाँव मा।
बइठे हावय नीम के ,माता सुघ्घर छाँव मा।।

दया मया ला राखले,आही सुरता तोर जी।
अउ आबे गा गाँव मा, फेर कभू तैं मोर जी।।

गाँव गली अउ खोर मा,लइका मन के शोर जी।
सूरज लाली देख के,सुघ्घर लगथे भोर जी।।

कौंआ बइठे छानही,करत हवय गा काँव ले।
आही घर मा जी सगा, देखत हंवव गाँव ले।।

जब ले गे हे ओ शहर,आथे ओकर याद जी।
राहन दूनो साथ मा,मिलबो बड़ दिन बाद जी।।

राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद।

चौपई छंद

।। चौपई छंद ।।
जय हो मइया जय हो तोर,सुनले विनती तैंहर मोर।
करदे किरपा दाई थोर,आय शरण मा हांवव तोर।।

मैं तो लइका तोर नदान, देदे मोला तै वरदान।
बेटा मोला अपने जान,निसदिन करहूँ तोर धियान।।

महिमा ला ओ रोजे गांव,जस ला तोरे मैं बगरांव।
देबे अँचरा मोला छांव,तोर मया ला मैं हर पांव।।

तोर शरण मा मनखे आय,आके ओमन माथ नवाय।
पान फूल ला धरके लाय, करके पूजा तोर चढ़ाय।।

घर घर मा हे तोरे वास,रहिथस तैं हा सबके पास।
करय तोर जे बिसवास,होवय पूरा ओकर आस।।

✍ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ✍

कज्जल छंद

कज्जल छंद   राजेश कुमार निषाद

मनखे मनखे बने जोड़।
भेद भाव ला अपन छोड़।
आथे कतको राह मोड़।
झन तैं सबले नता तोड़।

सबला संगी अपन जान।
झन कोनो मा भेद मान।
दू दिन के सब सगा तान।
एक सबो के हवय जान।

माटी के तन हवय तोर।
सुनले संगी गोठ मोर।
रखले गठरी बाँध जोर।
छूट जही कब प्राण तोर।

भरम भेद के अपन खोल।
बात मान ले झने डोल।
जिनगी के तैं समझ मोल।
मोह मया मा झने तोल।

रचनाकार- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...