।।मनहरण घनाक्षरी।।
रोज रोज गारी देत, सबके खबर लेत,
करके चारी चुगली,बानी ला लगाय हे।
सुने न काकरो बात,आथे घर मा वो रात,
करके जी मनमानी, पीके दारू आय हे।
बोली देख लड़खात,गोड़ हाँथ ल हलात,
पीके सिगरेट अब,धुआँ ल उड़ाय हे।
चिंता नइये धन के, करे अपने मन के,
भरे लालच मन मा, आँखी ल गड़ाय हे।
शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019
।।मनहरण घनाक्षरी।।
।।छप्पय छंद।।
छप्पय छंद - राजेश कुमार निषाद
(1) होवत बिहना रोज,काम मा वोहर जाथे।
बेरा देखत शाम,थके माँदे घर आथे।
पालन कर परिवार,मेहनत जादा करथे।
कमा कमा के रोज,पेट ल सबके भरथे।
घर के मुखिया वो हरे, देथे सबो धियान ला।
काहीं कम झन होय जी,लानय सबो समान ला।
(2) सुख दुख जिनगी मोर,लगे हे आना जाना।
मानुष तन के जात, कहाँ जी हवय ठिकाना।
आये खाली हाथ,छोड़ जी सबला जाहूँ।
नइये मोला लोभ,फेर काबर पछताहूँ।
करके सबले जी मया, सुख ला मैं हर पाँव गा।
कइसे मन के बात ला,सबला मोर बताँव गा।
(3) चलना संगी आज,हमन गा मंदिर जाबो।
करबो पूजा खास,चरण मा माथ नवाबो।
देथे जी वरदान, हवय प्रभु अंतर यामी।
लेके चलथे साथ,सरग के हावय धामी।
करहू झन गा पाप ला,देवव प्रभु ला मान जी।
प्रभु हे पालन हार गा, सबला दे वरदान जी।
(4) सेवा करके तोर,हमन जस ला सब गाबो।
आके दाई तोर,चरण मा माथ नवाबो।
हवन शरण मा तोर, हमर तैं लाज बचा दे।
अपने लइका जान,भाग ला हमर जगा दे।
करलव सेवा रोज गा, माता के दरबार मा।
अइसन मउका अउ कहाँ, मिलही गा संसार मा।
छंदकार - राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद जिला रायपुर छत्तीसगढ़
शनिवार, 5 अक्टूबर 2019
।।अमृत ध्वनि छंद।।
।।अमृत ध्वनि छंद।।
सेवा दाई के करव, मिलही अँचरा छाँव।
करथे सबले जी मया, जेकर कोरा ठाँव।।
जेकर कोरा,ठाँव बनाबे,दुलार पाबे।
भाग जगाबे,नाम कमाबे,मान बढ़ाबे।
संगे जाबे, हरिगुण गाबे,मानव माई।
सरग ल पाबे,करके आबे,सेवा दाई।। (1)
लागय भारी जाड़ जी,महिना अगहन आय।
देखत आगी आँच ला,तापे बर सब जाय।।
तापे बर सब,जाय भागत, लकड़ी लावत।
आग जलावत,जाड़ भगावत,बइठे तापत।
रात ल जागत,मजा उड़ावत, सबझन भागय।
घर सब जावत, मिलके काहत,जाड़ ह लागय।।(2)
मटका फोड़न गाँव मा,करके अड़बड़ शोर।
चढ़के संगी सब सखा,बाँधन मटका डोर।।
बाँधन मटका,डोर धरे हे, रंग बिरंगी।
आमा पाना,केरा नरियर, सबझन संगी।
खाके माखन, मारत हावय,देखव चटका।
हँसी खुशी ले ,फोड़व सबझन,एसो मटका।। (3)
रविवार, 3 मार्च 2019
मतगयंद सवैया
तैं सुनले कहना करहूँ बहिनी अब मैंहर तोर अगोरा।
तोर मया कइसे छुटही सुन आवत हावय देखव पोरा।।
आज सबो करके रखले बहिनी अपने सब तैंहर जोरा।
तोर सखी मन पूछत हावय की कब आवत हे मनटोरा।।
चौपाई छंद
।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव सुनलव बहिनी सुनलव भाई। ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...
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।।आजादी परब मनाबो।। चलव चलव सब दीदी भइया,आजादी परब मनाबो। तीन रंग के धजा तिरंगा,मिलके हम सब फहराबो।। गली गली मा योद्धा मन के,करत घूमबो जयकार...
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*।। मुक्तक क्या है।।* जो काव्य विधा भाव के दृष्टिकोण से अपने आप में पूर्ण हो वह मुक्तक कहलाता है। जैसे *- दोहा ,शेर आदि* दो पंक्ति के दोह...
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।।चौपई छंद।। गुरु के कहना तैंहर मान, गुरु हा देथे सबला ज्ञान। हवय दया के सागर जान,जग के हावय वो भगवान।। अँधरा मन के आँखी आय,भटके ला वो राह ब...