।।अमृत ध्वनि छंद।।
सेवा दाई के करव, मिलही अँचरा छाँव।
करथे सबले जी मया, जेकर कोरा ठाँव।।
जेकर कोरा,ठाँव बनाबे,दुलार पाबे।
भाग जगाबे,नाम कमाबे,मान बढ़ाबे।
संगे जाबे, हरिगुण गाबे,मानव माई।
सरग ल पाबे,करके आबे,सेवा दाई।। (1)
लागय भारी जाड़ जी,महिना अगहन आय।
देखत आगी आँच ला,तापे बर सब जाय।।
तापे बर सब,जाय भागत, लकड़ी लावत।
आग जलावत,जाड़ भगावत,बइठे तापत।
रात ल जागत,मजा उड़ावत, सबझन भागय।
घर सब जावत, मिलके काहत,जाड़ ह लागय।।(2)
मटका फोड़न गाँव मा,करके अड़बड़ शोर।
चढ़के संगी सब सखा,बाँधन मटका डोर।।
बाँधन मटका,डोर धरे हे, रंग बिरंगी।
आमा पाना,केरा नरियर, सबझन संगी।
खाके माखन, मारत हावय,देखव चटका।
हँसी खुशी ले ,फोड़व सबझन,एसो मटका।। (3)
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