छप्पय छंद - राजेश कुमार निषाद
(1) होवत बिहना रोज,काम मा वोहर जाथे।
बेरा देखत शाम,थके माँदे घर आथे।
पालन कर परिवार,मेहनत जादा करथे।
कमा कमा के रोज,पेट ल सबके भरथे।
घर के मुखिया वो हरे, देथे सबो धियान ला।
काहीं कम झन होय जी,लानय सबो समान ला।
(2) सुख दुख जिनगी मोर,लगे हे आना जाना।
मानुष तन के जात, कहाँ जी हवय ठिकाना।
आये खाली हाथ,छोड़ जी सबला जाहूँ।
नइये मोला लोभ,फेर काबर पछताहूँ।
करके सबले जी मया, सुख ला मैं हर पाँव गा।
कइसे मन के बात ला,सबला मोर बताँव गा।
(3) चलना संगी आज,हमन गा मंदिर जाबो।
करबो पूजा खास,चरण मा माथ नवाबो।
देथे जी वरदान, हवय प्रभु अंतर यामी।
लेके चलथे साथ,सरग के हावय धामी।
करहू झन गा पाप ला,देवव प्रभु ला मान जी।
प्रभु हे पालन हार गा, सबला दे वरदान जी।
(4) सेवा करके तोर,हमन जस ला सब गाबो।
आके दाई तोर,चरण मा माथ नवाबो।
हवन शरण मा तोर, हमर तैं लाज बचा दे।
अपने लइका जान,भाग ला हमर जगा दे।
करलव सेवा रोज गा, माता के दरबार मा।
अइसन मउका अउ कहाँ, मिलही गा संसार मा।
छंदकार - राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद जिला रायपुर छत्तीसगढ़
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें