रविवार, 29 मई 2016

।। छोटे से मोर गांव ।।

।। छोटे से हे मोर गांव ।।
रायपुर शहर म संगी
एक छोटे से हे मोर गांव।
पढ़ईया लईका अंव संगी
राजेश कुमार हे मोर नांव।
जनम के अंव मैं बिल्कुल छत्तीसगढ़िया।
सब कहिथे मोला मस्त मढ़िया।
हमर बस्ती म संगी
मस्त हे पीपर के छांव।
रायपुर शहर म संगी
एक छोटे से हे मोर गांव।
गली गली मैं घुमथंव अकेला।
सब कहिथे मोला अलबेला।
चाल मोर मस्ताना हे।
रूप के ये दीवाना हे।
फैसन के जमाना ये संगी
का बात मैं बतांव।
रायपुर शहर म संगी
एक छोटे से हे मोर गांव।
रहिथंव गवंई गांव देहात म।
हंसी मजाक रहिथे मोर बात म।
खेती बाड़ी करना पेशा  ये।
चना कस रेशा ये।
साग भाजी के हे बगीचा
कोन कोति मैं घुमांव।
रायपुर शहर म संगी
एक छोटे से हे मोर गांव।

राजेश कुमार निषाद

।। एक बीज ।।

।। एक बीज ।।
रात के अंधेरों में
गलियों के कचरों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
नदी नाले या पहाड़ में
हर एक जुबानों में
गांव गांव कोने कोने में
खेतखार खलिहानों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
गलियों के चौराहों में
तालब के किनारों में
लोगो के बीच हजारों में
सड़क के किनारों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
अनेको रूप वेश में
देश विदेश परदेश में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को

✒राजेश कुमार निषाद
9713872983

।। कलेवा ।।

।। कलेवा ।।
छत्तीसगढ़ के कलेवा बढ़ सुघ्घर लागथे ग।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
खीर पुड़ी बड़ा सुहारी।
घर म बनाये दीदी बहिनी अऊ महतारी।
पड़ोसी घलो येकर गोठ गोठियाथे ग।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
ठेठरी खुरमी अऊ नमकीन के बात निराला हे।
महर महर महके जे भजिया गुलगुला हे।
ये भजिया ल देख बबा के मुंह म पानी आथे ग।
आनि बानी पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
होवत बिहनिया घर म बनय मुठिया रोटी अऊ चीला।
दतवन मुखारी करके खाये सब माईपीला।
रसगुल्ला अऊ बालुसाय  के का कहना हे।
जलेबी ल देख के सबके लार टपकना हे।
अइरसा रोटी अऊ चउसेला मिरचा भजिया सब ल भाथे।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे।
परसा पान म बने अंगाकर रोटी सबके मन भाये।
टमाटर चटनी संग दबा के येला खाये।
ये हमर कलेवा खाये बर सब एक दूसर ल बलाथे।
छत्तीसगढ़ के कलेवा बढ़ सुघ्घर लागथे।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

।। जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयाँ ।।

।।जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयां।।
जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयां
परत हावंव तोर पईयां।
सुत उठ के होवत बिहनिया चरण तोर पखारंव।
मैं छत्तीसगढ़िया तोर लईका दाई
तोरे गुण ल गावंव।
सुरूर सुरूर हवा चले
पुरवाही म पाना डोले
कुहु कुहु बोले कोयली
नाचे मोर सोन चिरईया
जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयां
परत हावंव तोर पईयां
महर महर ममहावय तोर माटी
जेमा खेलन भउरां बांटी
तोर माटी म उपजय सोनहा धान
ये तोर माटी हे महान
हरियर हरियर दिखे रुखरईया
जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयां
परत हावंव तोर पईयां
चरण तोर पखारे महानदी अरपा पईरी
तोर कोरा म सब खेले नई हे कोनो बईरी
सब ल तै जीवन देवईया
जय हो तोर छत्तीसगढ़ीन मईयां
परत हावंव तोर पईयां

राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद समोदा
9713872983

।। राम वनवास ।।

।।राम वनवास।।
दशरथ जी रोवय धरर धरर
कौशिल्या रोवय धरर धरर
कहिके बेटा राम कहिके बेटा राम
मत जा बेटा हमन ल छोड़ के
मोर आंखी के तारा
मोर प्राण के अधारा
जावत हावस तै वनवास रे।
काला तै खाबे बेटा
काला तै पिबे रे
जावत हस तै बन म
कईसे तै रहिबे रे
झन जा बेटा मान जा ग
दशरथ जी रोवय धरर धरर
कौशिल्या रोवय धरर धरर
कहिके बेटा राम कहिके बेटा राम
पांव म तोर पनही नइये
तन म तोर कुरता
कईसे तै रहिबे बेटा
आहि तोला हमर सुरता
मत जा बेटा हमन ल छोड़ के
मोर  आंखी के तारा
मोर प्राण के अधारा
जावत हस तै वनवास रे
दूजे कस चंदा दिखत हे
आंखी ले आँसू टपकत हे
रोवत हे  सब नर नारी
संग म तै ले जात हस
भाई अऊ अपन सुवारी
मत जा बेटा हमन ल छोड़ के
दशरथ जी रोवय धरर धरर
कौशिल्या रोवय धरर धरर
कहिके बेटा राम कहिके बेटा राम
मोर आंखी के तारा
मोर प्राण के अधारा
जावत हस  तै वनवास रे

विरह गीत लिखने का प्रयास किया हूँ

राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद

।। माँ का आँचल ।।

।। मां का आँचल।।
कलकल करती मधुर ध्वनि
गीत मया के गाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है
जब जब मैं रोता हूँ
झट से मुझे उठा लेती है
चुप  न मैं होता हूँ
तो अपने सीने से लगा लेती है
मेरे नखरो को कितना ओ सहन करती है
फिर भी मुझे अपने पास रखती है
मुझको मुन्ना राजा कहकर ओ बुलाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गाके सुलाती है
मैं छोटा बच्चा आँख का तारा हूँ
अपने मां का मैं लाडला प्यारा हूँ
मेरे किलकारी घर में गूंजती है
रोने की आवाज सुनकर मां दौड़कर आती है
समझ तो नही है मुझमें
फिर भी बदमाशी न कर बेटा कहती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है

राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )

।। हमर छत्तीसगढ़ी बोली ।।

।। हमर छत्तीसगढ़ी बोली ।।

मिरचा कस चिप्पूर संगी
पताल कस गुत्तुर।
छत्तीसगढ़ राज्य संगी
राजधानी कस रायपुर।
जिहां मया के हे बड़ बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे इहां के भुईयां
करमा ददरिया गाथे इहां के गवईहा।
ठेठरी कस लागे कड़ा
अऊ नमकीन कस नुनछुर।
भजिया कस लागे
इहां के गुत्तुर बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
महानदी अरपा पईरी
इहां के सुंदरता ल बांधे हे।
सिहावा पहाड़ ह
सबो के ऊपर म विराजे हे।
पंछी परेवना ह गावय गाना
कुहकय रे कारी कोयलि।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे धान
जेकर निकले सोनहा बाली।
मन होगे हे गदगद जईसे
चिरईया फुदकथे ये डाली ओ डाली।
ममता मयी महतारी
जेकर कोरा म खेलथन आँख मिचउली।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
                ग्राम चपरीद ( समोदा )
           9713872983

।। पापी पेट के सवाल हे ।।

।। पापी पेट के सवाल हे ।।
दर दर मैं भटकत हंव बेटी
देख मोर कईसन हाल हे।
मोर बर तै अतेक सुघ्घर भोजन लाने
खाहूँ  मोर पापी पेट के सवाल हे।
लोग लईका ल पाल पोश के बड़े करेंव
फेर कोनो काम के नइये।
घर ले मोला बाहिर कर दिस
तभो ले ओमन ल चैन अराम नइये।
देवी बनके तै मोर करा आये
बेटी तोला मोर कतेक ख्याल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ
 मोर पापी पेट के सवाल हे।
सुघ्घर मानवता तै देखावत हस बेटी
फेर ये तो मोह माया के संसार हे।
आज तो तै मोला भोजन करावत हस
फेर मैं कहाँ जाहूँ न अब मोर घर द्वार हे।
सड़क किनारे मोर बसेरा बेटी
तन ढके बर न मोर करा चद्दर अऊ साल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ
 मोर पापी पेट के सवाल हे।
धन धन हे ओ दाई ददा
जऊन तोर जईसे बेटी ल जनम दे हे।
मोर जईसे गरीब अभागा करा
जऊन तोला भोजन धर के भेजे हे।
अईसन दाई ददा के मैं चरण पखारत हंव
जेकर तोर जईसन लाल हे।
तोर मया म मैं पेट भर खाहूँ
मोर पापी पेट के सवाल हे।

रचनाकार÷ राजेश कुमार निषाद
              ग्राम चपरीद ( समोदा )

।। मोर जनम देवईया दाई ।।

।। मोर जनम देवईया दाई ।।

मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
तै हावस ओ एति ओति
मैं तोला खोजंव कति कति।
नौ महीना ले अपन कोख म
रखे ओ मोला जतन के।
पांच बरस के होवत ले
दूध पिलाये अपन तन के।
कोख ले अपन जनम दे हस मोला
लाख लाख पीड़ा ल सहिके।
किसम किसम के मोला भोजन कराये हस
अपन लांघन भूखन रहिके।
कतेक तै दुख सहे ओ मोर सति
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
नान्हे पन ले मैं तोर दुलरवा रेहेंव
नई जानेंव तोर दुलार ओ।
कतेक मैं रोवंव चिल्लावंव
पर देवस तै भुलार ओ।
तोर मया के कतेक करंव बखान
पांव पखारंव तोर कोटि कोटि
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
अंगरी धर के  चले बर मोला
दाई तहीं हर सिखाये हस।
मैं तोर लईका दुलरवा दाई
गली खोर म घुमाये हस।
महिमा तोर निराली दाई
तोर गुण ल गावंव सबो कोति
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।

रचनाकार÷ राजेश कुमार निषाद
               ग्राम चपरीद (समोदा )

।। हमर महतारी ।।

।। हमर महतारी ।।
त्रेता युग से लेकर कलियुग तक,करम ठठाईस महतारी ग।
मोहमाया म भुलाके, रोईस दुनियादारी ग।
गली गली म घुमय संगी लईका ल कोरा म रख के नारी।
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी।
पढ़े हावव किताब म संगी,
नारी सती,अहिल्या,कौशिल्या के नाम ग।
ममता मयी महतारी के सुघ्घर हावे काम ग।
लार दुलार करईया  मईया बड़ी  हे प्यारी।
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी।
नव महीना ले अपन कोरा म,
राखिस हमला जतन के।
पांच बरस के होवत ले,
दूध पिलाईस अपन तन के।
दुःख के भार झेलईया दाई बड़ी हे न्यारी।
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी।
अईसन माँ के बेटा बने बर जग म आईस राम।
राम के नाम अमर होगे जानिस लोगन आम।
काकरो बहू बेटी बनिस त काकरो  बनिस सुवारी।
अईसन सुघ्घर हावे हमर महतारी।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद (समोदा)
मो.न.9713872983

।। बुढ़वा होगे जवान ।।

।। बुढ़वा होगे जवान रे ।।
आज कल के लईका  बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
नान नान टुरा मन के चुंदि पाक गे
देवव सब ध्यान रे।
घर के मुखिया डोकरा बने हे
देवय सब ल ताना रे।
घर अईसन बनाय हे संगी
जइसे लगत हे रजघराना रे।
जिन्स शर्ट पहिर के गली गली  घुमय
देवय सब ल ज्ञान रे।
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
बीड़ी पिये बर  छोड़त नई हे
खेसेर खेसेर खाँसत हे।
एकर टेस मरई ल देख के
गाँव के टुरा मन हाँसत हे।
मिठ बोले बर तो आय नही
निकले हमेशा कड़वा जुबान रे।
आज के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
बहू बेटा ल नई समझत हे
अपन बुढ़ापा के सहारा।
अईसन टेसिया तो डोकरा हे
अपन आप ल मानत हे कुंवारा।
एकर चरित्तर ल देख के
बहू बेटा होगे परेशान रे।
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
धोती बंगाली  ह नदागे
जीन्स शर्ट के जमाना आगे।
पाके चुंदि म करिया डाई लगाय
अईसन ये बहाना आगे।
फेर ये डोकरा नई माने अपन आप ल सियान रे।
एकरे सतिन काहत हव संगी
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
 अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोद )

।। जिनगी भर जुटहा कहाबे ।।

।। जिनगी भर जुटहा कहबे।।
मनखे के मन ल तै बदल ले ।
जउन देश अऊ जनता के सेवा करहि वोला अपन नेता चुन ले ।
पर आज के मनखे ललचिहा होगे ।
खाये पिये के अघुवा होगे ।
अईसन ललचिहा सरकार तै झन बनाबे ।
नही ते जिनगी भर जुटहा कहबे ।
जेन पार्टी म दारु मुर्गी मीलथे ।

आज के मनखे उही कोति ढरक जाथे ।
अईसन मनखे के सेति अनपढ़ घलो चुनाव जीत जाथे ।
आज राजनीति ह पार्टी बाजी होगे ।
मनखे एक दूसर के बैरी होगे ।
मिलजुल के रहई ल सब भुलागे ।
अईसन ललचिहा सरकार तै झन बनाबे ।
नही ते जिनगी भर जुटहा कहबे ।
आज एकता अऊ भाईचरा सिरागे ।
काबर सब के मन मे छल कपट समागे ।
जुटहई म मनखे अगुवागे ।
आज के चुनाव म दारु मांस के बीज बोवागे ।
करम करे हस अच्छा त पईसा ल दारू म झन लूटा ।
मनखे के हाव भाव ल  समझ अऊ पईसा ल सही जगह म लगा ।
तब जाके तै अच्छा नेता बना सकत हस ।
अऊ संग म रहिके गांव के विकास कराबे ।
नही ते जिनगी भर जुटहा कहाबे ।
                राजेश निषाद
              चपरीद ( समोदा )
             02/08/2015

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...