रविवार, 29 मई 2016

।। बुढ़वा होगे जवान ।।

।। बुढ़वा होगे जवान रे ।।
आज कल के लईका  बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
नान नान टुरा मन के चुंदि पाक गे
देवव सब ध्यान रे।
घर के मुखिया डोकरा बने हे
देवय सब ल ताना रे।
घर अईसन बनाय हे संगी
जइसे लगत हे रजघराना रे।
जिन्स शर्ट पहिर के गली गली  घुमय
देवय सब ल ज्ञान रे।
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
बीड़ी पिये बर  छोड़त नई हे
खेसेर खेसेर खाँसत हे।
एकर टेस मरई ल देख के
गाँव के टुरा मन हाँसत हे।
मिठ बोले बर तो आय नही
निकले हमेशा कड़वा जुबान रे।
आज के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
बहू बेटा ल नई समझत हे
अपन बुढ़ापा के सहारा।
अईसन टेसिया तो डोकरा हे
अपन आप ल मानत हे कुंवारा।
एकर चरित्तर ल देख के
बहू बेटा होगे परेशान रे।
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।
धोती बंगाली  ह नदागे
जीन्स शर्ट के जमाना आगे।
पाके चुंदि म करिया डाई लगाय
अईसन ये बहाना आगे।
फेर ये डोकरा नई माने अपन आप ल सियान रे।
एकरे सतिन काहत हव संगी
आज कल के लईका बुढ़वा होगे
 अऊ बुढ़वा होगे जवान रे।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोद )

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