।। एक बीज ।।
रात के अंधेरों में
गलियों के कचरों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
नदी नाले या पहाड़ में
हर एक जुबानों में
गांव गांव कोने कोने में
खेतखार खलिहानों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
गलियों के चौराहों में
तालब के किनारों में
लोगो के बीच हजारों में
सड़क के किनारों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
अनेको रूप वेश में
देश विदेश परदेश में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
✒राजेश कुमार निषाद
9713872983
रात के अंधेरों में
गलियों के कचरों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
नदी नाले या पहाड़ में
हर एक जुबानों में
गांव गांव कोने कोने में
खेतखार खलिहानों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
गलियों के चौराहों में
तालब के किनारों में
लोगो के बीच हजारों में
सड़क के किनारों में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
अनेको रूप वेश में
देश विदेश परदेश में
ढूंढा मैंने एक चीज को
जो बोया था एक बीज को
✒राजेश कुमार निषाद
9713872983
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें