।। हमर छत्तीसगढ़ी बोली ।।
मिरचा कस चिप्पूर संगी
पताल कस गुत्तुर।
छत्तीसगढ़ राज्य संगी
राजधानी कस रायपुर।
जिहां मया के हे बड़ बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे इहां के भुईयां
करमा ददरिया गाथे इहां के गवईहा।
ठेठरी कस लागे कड़ा
अऊ नमकीन कस नुनछुर।
भजिया कस लागे
इहां के गुत्तुर बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
महानदी अरपा पईरी
इहां के सुंदरता ल बांधे हे।
सिहावा पहाड़ ह
सबो के ऊपर म विराजे हे।
पंछी परेवना ह गावय गाना
कुहकय रे कारी कोयलि।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे धान
जेकर निकले सोनहा बाली।
मन होगे हे गदगद जईसे
चिरईया फुदकथे ये डाली ओ डाली।
ममता मयी महतारी
जेकर कोरा म खेलथन आँख मिचउली।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
मिरचा कस चिप्पूर संगी
पताल कस गुत्तुर।
छत्तीसगढ़ राज्य संगी
राजधानी कस रायपुर।
जिहां मया के हे बड़ बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे इहां के भुईयां
करमा ददरिया गाथे इहां के गवईहा।
ठेठरी कस लागे कड़ा
अऊ नमकीन कस नुनछुर।
भजिया कस लागे
इहां के गुत्तुर बोली
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
महानदी अरपा पईरी
इहां के सुंदरता ल बांधे हे।
सिहावा पहाड़ ह
सबो के ऊपर म विराजे हे।
पंछी परेवना ह गावय गाना
कुहकय रे कारी कोयलि।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
हरियर हरियर दिखे धान
जेकर निकले सोनहा बाली।
मन होगे हे गदगद जईसे
चिरईया फुदकथे ये डाली ओ डाली।
ममता मयी महतारी
जेकर कोरा म खेलथन आँख मिचउली।
अईसन सुघ्घर हावय संगी
हमर छत्तीसगढ़ी बोली।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
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