शनिवार, 21 सितंबर 2024

।। भारत माँ के बेटे।।

।। भारत माँ के बेटे।। ( राष्ट्र प्रेम )
भारत माँ के बेटे है, कभी नही मानेंगे हार।
वीर वंश के है बलिदानी, चाहे दे हमें मार।।

चढ़कर सरहद में हम, खड़े रहेंगे सीना तान।
दुश्मनों को मार गिरायेंगे, चाहे छूट जाये प्राण।।

जब जब दुश्मन आँख उठायेगा, खींच उठा लेंगे तलवार।
शोला बनकर कहर बरसेंगे, भागेगा दुश्मन सुनकर ललकार।।

सरहदों पर गोला बरसते हैं, होती है गोलियों की बौछार।
अपने कदम को कभी न रोकेंगे, भरके लड़ेंगे हुंकार।।

मर्दानी झाँसी की रानी, भरते है हमारे अंदर जोस।
लड़ जायेंगे हम दुश्मनों से, बनकर वीर सिपाही बोस।।

गाँधी भगत की कुर्बानी को, रखें है हम सब याद।
कैसे आज भुलायेंगे उनको, जिसकी बदौलत हमारा देश हुवा आजाद।।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद 
ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 

।।अरसात सवैया।।

।।अरसात सवैया।।
भागम भाग चले जिनगी कइसे कटही दिन हा तब मोर गा।
रोज थके घर आथँव मैं हर लेवय ना सुध ला सब मोर गा।
काम बुता करथोँ कतको मँय देखय हालत ला कब मोर गा।
आस लगाय महूँ रहिथो दिन आवय तो सुख.. के अब मोर गा।

।।पर्यावरण में करो सुधार।।

।।पर्यावरण में करो सुधार।।
अपनी सुख सुविधाओं के लिए क्यों वृक्ष को काट रहे हो।
नदी नालों तालाबों को क्यों तुम पाट रहे हो।

रोक दो तुम अपनी इस भयानक अत्याचार।
धरती माता कर रही पुकार पर्यावरण में करो सुधार।

जंगल के वृक्ष को काटोगे तो कहाँ से बचेगा बसंत बहार।
नदी नाले सूखे हो जायेंगे तो हर तरफ मचेगा हाहाकार।

इसलिए मैं पुनः कहता हूँ रोक दो तुम अपनी अत्याचार।
धरती माता कर रही पुकार पर्यावरण में करो सुधार।

वृक्ष को अगर तुम काटोगे तो सूरज की गर्मी बढ़ जायेगा।
ना तुम्हें छाँव मिलेगा और ना ही शुद्ध हवा मिल पायेगा।

छोड़ो अपने हठ को धरती माता की सेवा में मन रखो उदार।
धरती माता कर रही पुकार पर्यावरण में करो सुधार।

आओ हम संकल्प करे वृक्ष लगाकर करेंगे उसकी देखभाल।
हरे भरे वनों से तब जाकर धरती माता होगी खुशहाल।

नही काटेंगे अब वृक्षों को और नही करेंगे अत्याचार।
क्योंकि धरती माता कर रही पुकार पर्यावरण में करो सुधार।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 

।।जगमग जोत जले।।

।। जगमग जोत जले।।
जगमग जोत जले जगमग जोत जले
मइया तोर अँगना मा दाई तोर दुवारी मा
सुघ्घर फूल खिले जगमग जोत जले..........।

चैत कुँवार के महिना दाई जगमग जोत जलाथे
पावन तोर अँगना दाई जिहाँ सुघ्घर मेला भराथे
तोर अछरा के छाँव मा दाई सब हे पले
जगमग जोत जले जगमग जोत जले......

जोत के महिमा भारी हावय कहिथे चतुर सुजान
जगमग जगमग जलत रहिथे देखथे सारा जहान
तोर जोत के अँजोर ले दाई अँधियारी घलो धुले
जगमग जोत जले जगमग जोत जले..........

महिमा तोर अपार वो दाई कोनो पार नइ पाथे
मन के मनौती पाये बर तोर नाम के जोत जलाथे
तोर शरण मा जउन आथे सब दुख ला हे भुले 
जगमग जोत जले जगमग जोत जले..........

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 

।। कब आबे राम।।

।।कब आबे राम।।
तैं कब आबे राम अपन ममा के गाँव मा।
जोहत हावय इहाँ के नर नारी बइठे पीपर छाँव मा।

पहिरे हावय सब तन मा राम नाम के चोला।
आजे आही काली आही कहिके जोहत हावय तोला।
बड़ भागमानी इहाँ के मनखे तरगे जउन तोर नाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन.........

नदिया नरवा जंगल झाड़ी सबझन आज रोवत हे।
तोर चरण के धुर्रा ल पाये बर फेर ये खोजत हे।
जब रहे तैं बनवासी रामा गढ़िस नही काँटा तोर पाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन............

लइकापन मा आवस तैं अपन ममा के गाँव मा।
ठुमक ठुमक के तैं चलस बाजे पैजनिया तोर पाँव मा।
तोला घुमाये तोर ममादाई मेला मड़ई के ठाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन...........

जोहत तोला शबरी हर तर गे जूठा बोईर खवा के।
केवट भईया घलो तर गे डोंगा पार नहका के।
राम रमइया गावत हावय मया पिरित के छाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन...........।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 

।। हमर गँवई गाँव।।

।।हमर गँवई गाँव।।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई  गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।

रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक मा पड़थे।
नवा जिनगी के नवा रद्दा इहाँ के मनखे गढ़थे।।
पढ़ लिखके डॉक्टर,वकील,अउ बनगे हे गुरुजी।
कतको नौकरी कतको करत पुलिस बर तैयारी शुरू जी।।
अइसन गाँव मा जनम लेके धन्य अपन आप ला पाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई  गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।

बड़े बिहनिया पनिहारिन मन के पानी भरई।
राउत भइया के ढिलो बरदी ढिलो गाय चिल्लई।
गाँव के हमर निस्तारी तीन ठन तरिया हावय।
खेले कूदे बर गाँव मा थोकीन परिया हावय।।
उही मा हे आमा अमली बर पीपर के छाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई  गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।

बाँध सुघर बने हे नहा लव महानदी के निर्मल पानी मा।
कथा कहानी सुनलव संगी सियान मन के जुबानी मा।।
भेदभाव छुवाछुत ले दूरिहा, रहिथे भाई चारा मा।
रोज खुशी परब होवत अइसे लगथे पारा पारा मा।।
किस्सा तो कतको हे कतेक ला मैं बताँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई  गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।

दिन सोमवार के हमर गाँव मा बाजार भराथे।
आनी बानी साग भाजी कोचीया मन लाथे।
बजरंगबली,महादेव,सतबहनिया,सत्ती दाई के।
दर्शन कर लव संगी शीतला मईया महामाई के।
जाके शरण मा माता के महुँ माथ अपन नवाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई  गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 🖌️

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...