शनिवार, 21 सितंबर 2024

।। कब आबे राम।।

।।कब आबे राम।।
तैं कब आबे राम अपन ममा के गाँव मा।
जोहत हावय इहाँ के नर नारी बइठे पीपर छाँव मा।

पहिरे हावय सब तन मा राम नाम के चोला।
आजे आही काली आही कहिके जोहत हावय तोला।
बड़ भागमानी इहाँ के मनखे तरगे जउन तोर नाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन.........

नदिया नरवा जंगल झाड़ी सबझन आज रोवत हे।
तोर चरण के धुर्रा ल पाये बर फेर ये खोजत हे।
जब रहे तैं बनवासी रामा गढ़िस नही काँटा तोर पाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन............

लइकापन मा आवस तैं अपन ममा के गाँव मा।
ठुमक ठुमक के तैं चलस बाजे पैजनिया तोर पाँव मा।
तोला घुमाये तोर ममादाई मेला मड़ई के ठाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन...........

जोहत तोला शबरी हर तर गे जूठा बोईर खवा के।
केवट भईया घलो तर गे डोंगा पार नहका के।
राम रमइया गावत हावय मया पिरित के छाँव मा।
तैं कब आबे राम अपन...........।

रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 

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