।।हमर गँवई गाँव।।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।
रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक मा पड़थे।
नवा जिनगी के नवा रद्दा इहाँ के मनखे गढ़थे।।
पढ़ लिखके डॉक्टर,वकील,अउ बनगे हे गुरुजी।
कतको नौकरी कतको करत पुलिस बर तैयारी शुरू जी।।
अइसन गाँव मा जनम लेके धन्य अपन आप ला पाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।
बड़े बिहनिया पनिहारिन मन के पानी भरई।
राउत भइया के ढिलो बरदी ढिलो गाय चिल्लई।
गाँव के हमर निस्तारी तीन ठन तरिया हावय।
खेले कूदे बर गाँव मा थोकीन परिया हावय।।
उही मा हे आमा अमली बर पीपर के छाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।
बाँध सुघर बने हे नहा लव महानदी के निर्मल पानी मा।
कथा कहानी सुनलव संगी सियान मन के जुबानी मा।।
भेदभाव छुवाछुत ले दूरिहा, रहिथे भाई चारा मा।
रोज खुशी परब होवत अइसे लगथे पारा पारा मा।।
किस्सा तो कतको हे कतेक ला मैं बताँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।
दिन सोमवार के हमर गाँव मा बाजार भराथे।
आनी बानी साग भाजी कोचीया मन लाथे।
बजरंगबली,महादेव,सतबहनिया,सत्ती दाई के।
दर्शन कर लव संगी शीतला मईया महामाई के।
जाके शरण मा माता के महुँ माथ अपन नवाँव।
बड़ सुघर हावय संगी हमर गँवई गाँव।
महानदी के तीर मा बसे चपरीद जेकर नाँव।।
रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़ 🖌️
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