।।चौपई छंद।।
गुरु के कहना तैंहर मान, गुरु हा देथे सबला ज्ञान।
हवय दया के सागर जान,जग के हावय वो भगवान।।
अँधरा मन के आँखी आय,भटके ला वो राह बताय।
जउन शरण मा गुरु के जाय,वोहर कभू न धोखा खाय।।
गुरु सेवा मा लगा धियान, तब तो पाबे चोखा ज्ञान।
गुरु के महिमा भारी जान,देही तोला वो वरदान।।
गुरु के सेवा मा सब जाय, नइ तो छोटे बड़े कहाय।
सबला चोखा रहे बनाय,खोटा सिक्का तक चल जाय।।
मिले सहारा गुरु के तीर,रखले मनवा तैंहर धीर।
बदल जही तोरो तकदीर,हरथे गुरु हा सबके पीर।।
रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें