।।आल्हा छंद - भारत माँ के बेटा।।
भारत माँ के बेटा संगी,अपन कभू नइ मानव हार।
वीर वंश के मैं बलिदानी,देवय चाहे मोला मार।।
चढ़के संगी सरहद मैं हर,खड़े रहूँ जी सीना तान।
बइरी मन ला मार गिराहूँ, चाहे छूटे मोरो प्राण।।
जब जब बइरी आँख दिखाही,खींच उठा हूँ जी तलवार।
शोला बनके कहर बरस हूँ, भागय बइरी सुन ललकार।।
सरहद मा जी गोला बरसे,होवय गोली के बौछार।
अपन कदम ला कभू न रोकँव, भरके लड़हूँ मैं हुंकार।।
मरदानी झाँसी की रानी,भरथे मोरो अंदर जोस।
लड़ जाहूँ मैं बइरी मन से,बनके वीर सिपाही बोस।।
गाँधी भगत तोर कुरबानी, राखे हाँवव मैं हर याद।
कइसे आज भुलाहूँ ये दिन,होइस हमर देश आजाद।।
रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़।
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