मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

एक कार

*हास्य कविता
।। एक कार।।
मैंने बनाया है एक ऐसा कार,
जिसका करूँगा 2020 में अविष्कार।
उस कार पे सबकी नजरें टिकी है,
कार मेरे पहले से ही सवा दो लाख में बिकी है।
दाम बिल्कुल इसका खरा है,
सबके सर में चढ़कर पड़ा है।
इस कार की सीट ऐसी है,
बिल्कुल घर की सोफे सेट जैसी है।
खिड़कियाँ इसकी हवा का झोंका है,
हर कोई ने इस कार को रोका है।
कार में चढ़ने को बेताब है सवारी,
मेरे कार की वजन है बहुत भारी।
इसकी हर एक चीज प्लास्टिक का सेट है,
कार मेरा बिल्कुल धक्का प्लेट है।
दीवानों का दीवाना इस कार का आईना है,
इसलिए हर कोई इस कार का दीवाना है।
कार मेरा फैसन डिजाइनों से भरपूर है,
एक बार ठोका जाये तो बिल्कुल चूर चूर है।
कार कहीं ठोका जाये तो द एंड कर दूँगा,
पुनः इस कार की हैंडिल मैं खुद पकडूँगा।
चलाऊंगा मैं इसे धरती से लेकर आसमान तक,
बैठाऊँगा मैं इसमें सवारी से लेकर समान तक।
हर जगह मेरे चर्चा और मेरा नाम होगा,
फिर कारों का अविष्कार करना मेरा काम होगा।

रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा रायपुर छत्तीसगढ़

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