।। मां का आँचल।।
कलकल करती मधुर ध्वनि
गीत मया के गाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है
जब जब मैं रोता हूँ
झट से मुझे उठा लेती है
चुप न मैं होता हूँ
तो अपने सीने से लगा लेती है
मेरे नखरो को कितना ओ सहन करती है
फिर भी मुझे अपने पास रखती है
मुझको मुन्ना राजा कहकर ओ बुलाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गाके सुलाती है
मैं छोटा बच्चा आँख का तारा हूँ
अपने मां का मैं लाडला प्यारा हूँ
मेरे किलकारी घर में गूंजती है
रोने की आवाज सुनकर मां दौड़कर आती है
समझ तो नही है मुझमें
फिर भी बदमाशी न कर बेटा कहती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है
राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
कलकल करती मधुर ध्वनि
गीत मया के गाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है
जब जब मैं रोता हूँ
झट से मुझे उठा लेती है
चुप न मैं होता हूँ
तो अपने सीने से लगा लेती है
मेरे नखरो को कितना ओ सहन करती है
फिर भी मुझे अपने पास रखती है
मुझको मुन्ना राजा कहकर ओ बुलाती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गाके सुलाती है
मैं छोटा बच्चा आँख का तारा हूँ
अपने मां का मैं लाडला प्यारा हूँ
मेरे किलकारी घर में गूंजती है
रोने की आवाज सुनकर मां दौड़कर आती है
समझ तो नही है मुझमें
फिर भी बदमाशी न कर बेटा कहती है
मां के आँचल जैसा कही नही
जब ओ लोरी गा के सुलाती है
राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
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