।। बदलाव नवा साल म ।।
जगह जगह म घटना घटत हे
देखव कईसन हाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
दिनो दिन मंहगाई बढ़त हे।
भाई भाई एक दूसर से लड़त हे।
गरीब मनखे मन बर करलई होगे।
अब के सरकार निरदई होगे।
मंहगाई बढ़ा दिस दाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
पढ़े लिखे मन बेगारी करत हे।
अनपढ़ मन हिस्सेदारी बर लड़त हे।
जगह जगह म भुइंया के बटवारा होवत हे।
अईसन भरे दलाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
गली गली म पानी बोहावत हे
चिखला माते हे भारी।
घर घर म नल लगावत हे
एक दूसर ल देवत हे गारी।
आरा पारा सबो पारा रमे हे सब बवाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
दाई ददा ल संसो नई हे
बेटा घुमक्कड़ होगे।
काम बुता के फिकर नई हे
ददा पियक्कड़ होगे।
जिनगी कटत हे येकर बुरा हाल म।
सोचव सब कुछ विचार
लाबोन बदलाव नवा साल म।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
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