गुरुवार, 16 अगस्त 2018

बेटी ला भी दव शिक्षा अउ संस्कार


।। बेटी ल दव शिक्षा अऊ संस्कार  ।।
कोनो अपन बेटी  ल देवव झन मार,
बेटी ल  घलो बेटा बरोबर करो प्यार।
बेटी बर घलो बने होहि ये संसार,
बेटी ल भी  दव शिक्षा अऊ संस्कार।।

             जब तुमन थके मांदे घर म आथव,
              त बेटी ह सब ल हंसाथे।
                बेटी बर तुमन मया नई करव,
              तभो ले वोहा अपन मया लुटाथे।
              मान लव तुमन बेटी ल बेटा बरोबर
              अपन जीवन के अधार।
              बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।।

बेटी हरय घर के लक्ष्मी,
सबो के चिंता ल दूर करथे जी।
सबके राजदुलारी बिटिया रानी,
घर आँगन ल महकाथे जी।
येकरे ले तो सजथे ग घर अऊ दुवार
बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

              बेटी जनम धरे हावय जग मा,
              घर घर म जाके ये भरम मिटाही।
              बेटी कभू काकरो बर बोझ नइ होवय,
              सब समाज मा ये अलख जगाही।
              जेन बेटी ले मया करे बर नई जानय,
              ओकर जीना हावय ग धिक्कार।
              बेटी ल भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

कहिथव न की नारी पढ़ही
त विकास करही।
या पढ़ा लिखा दव नारी ल
एक लईका के महतारी ल।
बेटी बेटा म भेद झन करव
लावव ग नवा विचार
बेटी ल  भी दव शिक्षा अऊ संस्कार।

रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983

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