सोमवार, 9 जुलाई 2018

कज्जल छंद

कज्जल छंद   राजेश कुमार निषाद

मनखे मनखे बने जोड़।
भेद भाव ला अपन छोड़।
आथे कतको राह मोड़।
झन तैं सबले नता तोड़।

सबला संगी अपन जान।
झन कोनो मा भेद मान।
दू दिन के सब सगा तान।
एक सबो के हवय जान।

माटी के तन हवय तोर।
सुनले संगी गोठ मोर।
रखले गठरी बाँध जोर।
छूट जही कब प्राण तोर।

भरम भेद के अपन खोल।
बात मान ले झने डोल।
जिनगी के तैं समझ मोल।
मोह मया मा झने तोल।

रचनाकार- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद

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