बुधवार, 15 जून 2016

जागो रे किसान

       ।। जागो रे किसान ।।
जागो रे जागो रे जागो किसान
होगे हावय नवा बिहान
नागर बईला धर के निकलथव होवत बिहना
मुड़ी म पागा बांधे रहिथव तुमन किसनहा
नुन चटनी म खाथव बासी
गिरत पानी म करथव बियासी
तुहरे मेहनत ले दिखथे हरियर हरियर धान
जागो रे जागो रे जागो किसान
होगे हावय नवा बिहान
कारी घटा कस दिखत हे बादर जइसे छाये बदरा
तोर अगोरा म रहिथे किसान भर दे तै खचका डबरा
बनी मजदूरी  के तुमन करईया
बंजर भुईयां म धान उपजईया
माटी हावय ग तुहर मितान
जागो रे जागो रे जागो किसान
होगे हावय नवा बिहान
सबके पालन पोषण करईया हावव तुमन खेवनहार
तुहर ले बढ़के कोनों नई हे जग में
करव तुमन सबके उद्धार
सरग बरोबर ये भुईयां के तुमन हव भगवान
जागो रे जागो रे जागो किसान
होगे हावय नवा बिहान
नागर बईला तुहर संगवारी
छत्तीसगढ़ हावय महतारी
धान के कटोरा जिहां  सोन चिरईया नाचय
अईसन काहय ग हमर सियान
जागो रे जागो रे जागो किसान
होगे हावय नवा बिहान
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा ) 11/06/2016

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