।। चौपाई छंद ।।
महिना सावन जब जब आथे, भोले बाबा सबो मनाथे।
होवत बिहना मंदिर जाथे,जस ला तोरे सबझन गाथे।।
बेल पान के महिमा जाने,फूल धतूरा संगे लाने।
होवत बिहना मंदिर जाथे,करके पूजा सबो चढ़ाथे।।
डमरू धारी अवघट दानी,बाबा हावय बड़ बरदानी।
जउन शरण मा ओकर जाथे,मन वाँछित फल ओहर पाथे।।
राख अंग मा काने बाला, पहिरे हावय बघवा छाला।
नंदी बइला करे सवारी,बाबा हावय डमरू धारी।।
तोर जटा ले निकले गंगा,देखत होथे मन हा चंगा।
अरजी हमरो सुनले बाबा,नइ जा पावन कांसी काबा।।
रचनाकार :- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़
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