रविवार, 5 जुलाई 2020

शंकर छंद

।।शंकर छंद।।

बरसत हावय रिमझिम पानी,खुशी मन मा  छाय। 
उमड़ घुमड़ के करिया बादर, अबड़ गा बरसाय।।
नदिया नरवा छलकत हावय,आय हवय उफान।
हरियर हरियर दिखत हावय,खेत अउ खलिहान।।


रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़
 छंद  साधक कक्षा - 4

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...