।।शंकर छंद।।
बरसत हावय रिमझिम पानी,खुशी मन मा छाय।
उमड़ घुमड़ के करिया बादर, अबड़ गा बरसाय।।
नदिया नरवा छलकत हावय,आय हवय उफान।
हरियर हरियर दिखत हावय,खेत अउ खलिहान।।
रचनाकार:- राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर छत्तीसगढ़
छंद साधक कक्षा - 4
।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव सुनलव बहिनी सुनलव भाई। ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...
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