रविवार, 28 जून 2020

छप्पय छंद

काटत हावय पेड़,कहाँ ले छइयाँ पाबो।
बिना पेड़ के आज,हवा बिन सब मर जाबो।।
नइ बच ही जब पेड़,धरा बंजर हो जाही।                                           बढ़ जाही बड़ ताप,छाँव बर सब पछताही।।

।।राजेश कुमार निषाद।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

चौपाई छंद

।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव  सुनलव बहिनी सुनलव भाई।  ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...