काटत हावय पेड़,कहाँ ले छइयाँ पाबो।
बिना पेड़ के आज,हवा बिन सब मर जाबो।।
नइ बच ही जब पेड़,धरा बंजर हो जाही। बढ़ जाही बड़ ताप,छाँव बर सब पछताही।।
।।राजेश कुमार निषाद।।
।।चौपाई छंद।। जात पात, ऊँच नीच, भेद भाव सुनलव बहिनी सुनलव भाई। ऊँच नीच के करव बिदाई।। रहव बनाके भाई चारा। छुआ-छूत ला करव किनारा।। हिन्दू म...
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