शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

जलहरण घनाक्षरी

।।नशा करय नाश।।

मंगलू हा पीये दारू, बीड़ी ला फुँके बुधारू, समारू चरस गाँजा, रबि गुटखा खावय।
नशा हे ख़राब तोर, भावै नहीं मोला थोर, बात एक दूसर ला,मिलके समझावय।
चारो नशा के शिकार, धीरे-धीरे हो बीमार, मउत के खचवा मा, जाके रोज समावय।
नशा काँही के भी होय, जाथे सब कुछ खोय, खड़े यम द्वार लोग, सोच के पछतावय।।

राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद रायपुर 

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