लोकगीत के गायक संगी , नाम हवय जेकर केदार।
दुरुग जिला मा जनम धरिन हे, लोककला ला दिस आकार।।
झुमुकलाल गा नाम पिता के, कलाकार नाचा के आय।
दादा गावय बाँस गीत ला, बचपन ले जे ओला सिखाय।।
ढोलक अउ तबला वादन मा, अलग हवै जेकर पहिचान।
कवि मुकुंद कौशल के संगे, मंच बनायिन नवा बिहान।।
चंदैनी गोंदा ले जेहर, करिन सफलता के शुरुवात।
नाम अमर होगे दुनिया मा, छत्तीसगढ़ी गाना गात।।
तै बिलासपुरहिन हस गाना, हवै मया लाटा लपटाय।
तै अगोर लेबे रे संगी,प्रेम गीत हा सब ला भाय।।
गाँव-गाँव मा बाजत रहिथे, सुनथन सुग्घर जेकर गीत।
गायक अउ संगीतकार जे, लेवय लोगन के दिल जीत।।
राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद
रायपुर (छ. ग.)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें